गणपति तेरे चरणों की, पग धूल जो मिल जाए (Ganapati Tere Charno Ki Pag Dhool Jo Mil Jaye)

गणपति तेरे चरणों की,

बप्पा तेरे चरणों की,

पग धूल जो मिल जाए,

सच कहता हूँ गणपति,

तकदीर सम्भल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥


सुनते है तेरी रेहमत,

दिन रात बरसती है,

इक बूँद जो मिल जाए,

मन की कली खिल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥


ये मन बड़ा चंचल है,

कैसे तेरा भजन करूँ,

जितना इसे समझाऊं,

उतना ही मचल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥


नजरो से गिराना ना,

चाहे जो भी सजा देना,

नजरो से जो गिर जाए,

मुश्किल ही संभल पाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥


बप्पा इस जीवन की,

बस एक तम्मना है,

तुम सामने हो मेरे,

मेरा दम ही निकल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥


गणपति तेरे चरणों की,

बप्पा तेरे चरणों की,

पग धूल जो मिल जाए,

सच कहता हूँ गणपति,

तकदीर सम्भल जाए,

गणपति तेरें चरणों की ॥

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माघ कृष्ण की षट्तिला एकादशी (Magh Krishna ki Shattila Ekaadashee)

एक समय दालभ्यजी ने प्रजापति ब्रह्माजी के पुत्र पुलस्त्य जी से प्रश्न किया कि प्रभो! क्या कोई ऐसी भी शक्ति या उपाय है कि जिसके करने से ब्रह्महत्या करने इत्यादि के कुटिल कर्मों के पापों से मनुष्य सरलता पूर्वक छूट जाय भगवन् !

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो (Hey Dayamay Aap Hi Sansar Ke Adhar Ho)

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो।
आप ही करतार हो हम सबके पालनहार हो॥

मार्गशीर्ष माह में कब-कब पड़ेंगे प्रदोष व्रत?

हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह व्रत पूर्ण रूप से भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है।

उनकी रेहमत का झूमर सजा है (Unki Rehmat Ka Jhoomar Saja Hai)

उनकी रेहमत का झूमर सजा है ।
मुरलीवाले की महफिल सजी है ॥

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