बड़ी देर भई, कब लोगे खबर मोरे राम (Badi Der Bhai Kab Loge Khabar More Ram)

बड़ी देर भई, बड़ी देर भई,

कब लोगे खबर मोरे राम,

बड़ी देर भई,


कहते हैं तुम हो दया के सागर,

फिर क्यूँ खाली मेरी गागर,

झूमें झुके कभी ना बरसे,

कैसे हो तुम घनश्याम ,

हे राम, हे राम

बड़ी देर भई, बड़ी देर भई,

॥ कब लोगे खबर...॥


सुनके जो बहरे बन जाओगे ,

आप ही छलिया कह लाओगे,

मेरी बात बने ना बने ,

हो जाओगे तुम बदनाम,

हे राम, हे राम

बड़ी देर भई, बड़ी देर भई,

॥ कब लोगे खबर...॥


चलते-चलते मेरे पग हारे,

आई जीवन की शाम ,

कब लोगे खबर मोरे राम,

हे राम, हे राम


बड़ी देर भई, बड़ी देर भई,

कब लोगे खबर मोरे राम,

बड़ी देर भई,


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ऐसे मेरे मन में विराजिये - भजन (Aaise Mere Maan Main Virajiye)

ऐसे मेरे मन में विराजिये
ऐसे मेरे मन में विराजिये

गजानंद महाराज पधारो कीर्तन की तैयारी है(Gajanand Maharaj Padharo Kirtan Ki Taiyari Hai)

प्रथम मनाये गणेश के, ध्याऊ शारदा मात,
मात पिता गुरु प्रभु चरण मे, नित्य नमाऊ माथ॥

नन्द के आनंद भयो(Nand Ke Anand Bhayo)

आनंद उमंग भयो,
जय हो नन्द लाल की ।

होली और रंगों का अनोखा रिश्ता

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ये खुशियां, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गिले-शिकवे भुलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा है कि होली पर रंग लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है, जो भगवान श्रीकृष्ण और प्रह्लाद से जुड़ी है।

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