बैठी हो माँ सामने, कर सोलह श्रृंगार (Baithi Ho Maa Samne Kar Solah Shringar)

बैठी हो माँ सामने,

कर सोलह श्रृंगार,

तू करुणा की है मूरत,

और ममता का भण्डार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


निरख रही हो हम भक्तों को,

बड़े प्यार से जगजननी,

इसी तरह हम भक्तों को भी,

तेरी ही सेवा करनी,

तू हरदम देती रहना,

हमको माँ प्यार दुलार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


तेरी ममता की छाया में,

इसी तरह हम पले बढ़े,

तेरी किरपा से ही माता,

हम अपने पैरो पे खड़े,

तेरे बच्चों को देने में,

तू करती नहीं इन्कार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


हम बच्चों पर हरदम मैया,

आशीर्वाद तुम्हारा हो,

‘हर्ष’ कहे माँ शेरोवाली,

हरपल साथ तुम्हारा हो,

तू हाथ दया का रखना,

सांचा तेरा दरबार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


बैठी हो माँ सामने,

कर सोलह श्रृंगार,

तू करुणा की है मूरत,

और ममता का भण्डार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥

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शरण में आये हैं हम तुम्हारी (Sharan Mein Aaye Hain Hum Tumhari)

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,
दया करो हे दयालु भगवन ।

सजधज कर जिस दिन, मौत की शहजादी आएगी (Saj Dhaj Kar Jis Din Maut Ki Sahjadi Aayegi)

सजधज कर जिस दिन,
मौत की शहजादी आएगी,

भगवत गीता चालीसा ( Bhagwat Geeta Chalisa )

प्रथमहिं गुरुको शीश नवाऊँ | हरिचरणों में ध्यान लगाऊँ ||१||

भद्रा में रावण की वजह से नहीं बांधी जाती राखी

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