भक्तों के घर कभी, आजा शेरावाली (Bhakton Ke Ghar Kabhi Aaja Sherawali)

भक्तों के घर कभी,

आजा शेरावाली,

कुटिया का मान,

बढ़ा जा शेरावाली,

भक्तो के घर कभी,

आजा शेरावाली ॥


पलकों के आसन पे,

तुझको बिठाएंगे,

हलवा पूड़ी का मैया,

भोग लगाएंगे,

भाव का ये भोग,

लगा जा शेरावाली,

भक्तो के घर कभी,

आजा शेरावाली ॥


इन अखियों को बस,

मैया तेरी आस है,

आएगी जरूर माता,

रानी विश्वास है,

भक्तो की आस,

पूरा जा शेरावाली,

भक्तो के घर कभी,

आजा शेरावाली ॥


आजा आजा मैया,

तेरा लाड लड़ाएंगे,

‘सौरभ मधुकर’ संग,

भजन सुनाएंगे,

रिश्ता ये प्रेम का,

निभा जा शेरावाली,

भक्तो के घर कभी,

आजा शेरावाली ॥


भक्तों के घर कभी,

आजा शेरावाली,

कुटिया का मान,

बढ़ा जा शेरावाली,

भक्तो के घर कभी,

आजा शेरावाली ॥

........................................................................................................
वैकुण्ठ चतुर्दशी की कथा (Vaikunth Chaturdashi Ki Katha)

वैकुण्ठ चतुर्दशी को लेकर एक कथा काफी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार एक बार श्रीहरि विष्णु देवाधिदेव शंकर जी का पूजन करने के लिए काशी आए थे।

वन्दे मातरम् - राष्ट्रगीत (Vande Mataram - National Song)

वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्

कभी भूलू ना.. मेरे राधा रमण (Kabhi Bhoolun Na Radha Raman Mere)

कभी भूलू ना कभी भूलू ना
कभी भूलू ना याद तुम्हारी

म्हारा सालासर का बाला, ओ जी अंजनी माँ का लाला(Mhara Salasar Ka Bala O Ji Anjani Maa Ka Lala)

म्हारा सालासर का बाला,
ओ जी अंजनी माँ का लाला,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने