दृष्टि हम पे दया की माँ डालो (Drashti Hum Par Daya Ki Maa Dalo)

दृष्टि हम पे दया की माँ डालो,

बडी संकट की आई घड़ी है ।

द्वार पर तेरे हम भी खड़े है,

आँखो में आँसुओ कि झड़ी है ॥


निर्बल का सहारा यही है,

रास्ता दुसरा ना कही है ।

तेरा दर्श अगर तू दिखा दे,

टूट जाये गमो की लड़ी है ॥


सारे भक्तो को तुमने है तारा,

वासता तुमसे भी है हमारा ।

तार दे माँ तेरे बालकों को,

हम पर विपदा ही ऐसी पड़ी है ॥


फरियादों की झोली अड़ी है,

फते करने को माँ तू खड़ीं है ।

ये शिवाजी को आशिष दे कर,

धन्य करदे तू सबसे बड़ी है ॥


दृष्टि हम पे दया की माँ डालो,

बडी संकट की आई घड़ी है ।

द्वार पर तेरे हम भी खड़े है,

आँखो में आँसुओ कि झड़ी है ॥

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अवध में छाई खुशी की बेला (Avadh Me Chhai Khushi Ki Bela)

अवध में छाई खुशी की बेला,
​अवध में छाई खुशी की बेला,

श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी (Shri Krishna Govind Hare Murari)

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥

शिवाष्ट्कम्: जय शिवशंकर, जय गंगाधर.. पार्वती पति, हर हर शम्भो

जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणाकर करतार हरे,
जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी सुख-सार हरे,

सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है(Sare Jahan Ke Malik Tera Hi Aasara Hai)

सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है,
राजी हैं हम उसी में, जिस में तेरी रजा है,

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