गजानंद जी ने, ल्यावो रे मनाय, वारी जाऊं (Gajanand Ji Ne Lavo Re Manay Vari Jaun)

गजानंद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में,

चरणन में देवा चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥

सूंड सुंडाला दुंद दूण्डाला,

म्हारी सभा में रंग बरसाय,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


पार्वती रा पुत्र हो प्यारा,

शिव शंकर रा राज दुलार,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


चढ़न चढ़ावा चूरमो,

थारे लड्डुवन रो भोग लगाय,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


रणत भवन स्यूं आवो गजानंद,

रिद्धि सिद्धि ने संग में लाय,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


गजानंद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में,

चरणन में देवा चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


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कहियो दर्शन दीन्हे हो, भीलनियों के राम (Kahiyo Darshan Dinhe Ho Bhilaniyo Ke Ram)

पंथ निहारत, डगर बहारथ,
होता सुबह से शाम,

महाशिवरात्रि पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम

महाशिवरात्रि, हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर, प्रत्येक हिंदू घर में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण होता है। शिव भक्त इस दिन विशेष रूप से व्रत रखते हैं और चारों पहर में भगवान शिव की आराधना करते हैं।

मैया के पावन चरणों में (Maiya Ke Pawan Charno Mein)

मैया के पावन चरणों में,
तू सर झुका के देख ले,

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा (Jaha Le Chaloge Vahi Me Chalunga)

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,
जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ।

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