हे आनंदघन मंगलभवन, नाथ अमंगलहारी (Hey Anand Ghan Mangal Bhawa)

हे आनंदघन मंगलभवन,

नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी,

रघुवर कृपाल प्रभु प्रनतपाल,

अब राखो लाज हमारी,

हम आए शरण तुम्हारी,

हे आनंद घन मंगल भवन,

नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी ॥


तुम जैसा नहीं पतित उदाहरण,

पतित नहीं हम जैसा,

बिन कारण जो द्रवे दीन पर,

देव ना दूजा ऐसा,

हम है दीन तुम दीनबंधु,

तुम दाता हम है भिखारी,

श्री राम जय जय राम,

श्री राम जय जय राम,

हे आनंद घन मंगल भवन,

नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी ॥


दो अक्षर का नाम है,

राम तुम्हारा नाम,

दो अक्षर का भाव ले,

तुमको करे प्रणाम ॥


यही सोचकर अंतर्मन पर,

लिख लिया नाम तुम्हारा,

राम लिखा जिन पाषाणों पर,

उनको तुमने तारा,

राम से राम का नाम बड़ा है,

नाम की महिमा भारी,

श्री राम जय जय राम,

श्री राम जय जय राम,

हे आनंद घन मंगल भवन,

नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी ॥


हे आनंदघन मंगलभवन,

नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी,

रघुवर कृपाल प्रभु प्रनतपाल,

अब राखो लाज हमारी,

हम आए शरण तुम्हारी,

हे आनंद घन मंगल भवन,

नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी ॥

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हम वन के वासी, नगर जगाने आए (Hum Van Ke Vaasi Nagar Jagane Aaye)

हम वन के वासी,
नगर जगाने आए ॥

क्यों मनाते हैं गणेश जयंती

गणेश जयंती भगवान गणेश जी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है।

हर सांस मे हो सुमिरन तेरा (Har Saans Me Ho Sumiran Tera)

हर सांस मे हो सुमिरन तेरा,
यु बित जाये जीवन मेरा,

तेरा दरबार हमनें सजाया है माँ(Tera Darbar Humne Sajaya Hai Maa)

तेरा दरबार हमनें सजाया है माँ,
तुमको बुलाया है माँ,

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