हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा(Ho Gaye Bhav Se Par Lekar Naam Tera)

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥

वाल्मीकि अति दुखी दीन थे,

बुरे कर्म में सदा लीन थे,

करी रामायण तैयार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥


थे नल-नील जाति के वानर,

राम नाम लिख दिया शिला पर,

हो गई सेना पार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥


भरी सभा में द्रुपद दुलारी,

कृष्ण द्वारिकानाथ पुकारी,

बढ़ गया चीर अपार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥


गज ने आधा नाम पुकारा,

गरूड़ छोड़ कर उसे उबारा,

किया ग्राह उद्धार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥


मीरा गिरधर नाम पुकारी,

विष-अमृत कर दिए मुरारी,

खुलगए चारों द्वार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥


राम नाम को जो कोई गावे,

अपने तीनों लोक बनावे,

है जीवन का सार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥


जिनको स्वयं तार नहीं पाये,

नाम लिये से मुक्ति पाये,

महिमा नाम अपार लेकर नाम तेरा,

हो गए भव से पार लेकर नाम तेरा ॥

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फूल भी न माँगती, हार भी न माँगती (Phool Bhi Na Mangti Haar Bhi Na Mangti)

फूल भी न माँगती,
हार भी न माँगती,

वीरविंशतिकाख्यं श्री हनुमत्स्तोत्रम्

लाङ्गूलमृष्टवियदम्बुधिमध्यमार्ग , मुत्प्लुत्ययान्तममरेन्द्रमुदो निदानम्।

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