झोली भर लो भक्तो, दौलत बरसे भोले के दरबार (Jholi Bharlo Bhakto Daulat Barse Bhole Ke Darbar)

झोली भर लो भक्तो,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी,

दातारि का क्या कहना है,

दातारि का क्या कहना,

सरकारों की सरकार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥


रंग रंगीला महीना देखो,

सावन भोले बाबा का,

जैसे सावन बरसे वैसे,

बरसा दे भंडार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥


देते देते ये ना हारे,

तू लेते थक जाएगा,

भर भर मुट्ठी खूब लुटाए,

ऐसा है दातार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥


‘बनवारी’ शिव के भक्तो का,

देखा ठाठ निराला जी,

बारह महीना मने दिवाली,

मौज करे परिवार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥


झोली भर लो भक्तो,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी,

दातारि का क्या कहना है,

दातारि का क्या कहना,

सरकारों की सरकार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥

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रंग पंचमी की कथा

रंग पंचमी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है और यह पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं और उनकी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।

झूम उठा दिल देख नजारा, उस सालासर धाम का(Jhoom Utha Dil Dekho Nazara Us Salasar Dham Ka)

झूम उठा दिल देख नजारा,
उस सालासर धाम का,

बोल राधे, बोल राधे (Bol Radhey, Bol Radhey)

पूछते हो कैसे
पूछते हो कैसे

माँ सरस्वती! मुझको नवल उत्थान दो (Mujhko Naval Utthan Do, Maa Saraswati Vardan Do)

मुझको नवल उत्थान दो ।
माँ सरस्वती! वरदान दो ॥

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