लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत (Lagi Re Meri Maiya Ji Se Preet)

हार की कोई चिंता नहीं,

पग पग होगी जीत,

लगी रे मेरी लगी रे मेरी,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत,

मात मात का नगमा गाए,

मात मात का नगमा गाए,

ये जीवन संगीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥


मौज से होने लगा गुजारा,

मैया ने हर काम संवारा,

सन्मुख मिलती मात भवानी,

जब जब माँ को मन से पुकारा,

देती नहीं विश्वास टूटने,

देती नहीं विश्वास टूटने,

माँ अम्बे की रीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥


जब जब मन से माँ को पुकारा,

मैया का संदेसा आया,

मोह लोभ जो लगा भरमाने,

मैया ने खुद आप बचाया,

ऐसा किया मेरी मैया ने जादू,

ऐसा किया मेरी मैया ने जादू,

संवरा भविष्य अतीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥


‘सरल’ भवानी का है चाकर,

हाथ पकड़कर तूने उबारा,

गम के थपेड़ो से डोली थी नैया,

बनके खिवैया मैया तूने तारा,

‘रामकुमार’ डूबेगा कैसे,

‘रामकुमार’ डूबेगा कैसे,

माँ से जिसकी प्रीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥


हार की कोई चिंता नहीं,

पग पग होगी जीत,

लगी रे मेरी लगी रे मेरी,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत,

मात मात का नगमा गाए,

मात मात का नगमा गाए,

ये जीवन संगीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥

........................................................................................................
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि

मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। सनातन धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का एक विशेष महत्व है, यह दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का होता है।

जो देना हो तो मईया, उपहार ये देना (Jo Dena Ho To Maiya Uphar Ye Dena)

जो देना हो तो मईया,
उपहार ये देना,

गौरी नंदन तेरा वंदन, करता है संसार (Gauri Nandan Tera Vandan Karta Hai Sansar)

गौरी नंदन तेरा वंदन,
करता है संसार,

संसार के लोगों से आशा ना किया करना(Sansar Ke Logon Se Asha Na Kiya Karna)

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई ना हो अपना,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।