मेरे राघव जी उतरेंगे पार, गंगा मैया धीरे बहो(Mere Raghav Ji Utrenge Paar, Ganga Maiya Dheere Baho)

मेरे राघव जी उतरेंगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो,

मैया धीरे बहो,

मैया धीरे बहो,

मेरे राघव जी उतरेगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो ॥


गहरी नदियां नाव पुरानी,

चले पुरवैया ना गति ठहरानी,

मेरे प्रियतम बड़े सुकुमार,

गंगा मैया धीरे बहो,

मेरे राघव जी उतरेगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो ॥


राम सिया और लखन विराजे,

शीश जटा तन मुनिपट साजे,

आज शोभा बनी है अपार,

गंगा मैया धीरे बहो,

मेरे राघव जी उतरेगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो ॥


पुलक शरीर नीर अंखियन में,

आनंद मगन होत दर्शन में,

भवसागर से मोहे उतार,

गंगा मैया धीरे बहो,

मेरे राघव जी उतरेगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो ॥


मेरे राघव जी उतरेंगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो,

मैया धीरे बहो,

मैया धीरे बहो,

मेरे राघव जी उतरेगे पार,

गंगा मैया धीरे बहो ॥

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मसान होली की पौराणिक कथा

मसान होली दो दिवसीय त्योहार माना जाता है। मसान होली चिता की राख और गुलाल से खेली जाती है। काशी के मणिकर्णिका घाट पर साधु-संत इकट्ठा होकर शिव भजन गाते हैं और नाच-गाकर जीवन-मरण का जश्न मनाते हैं और साथ ही श्मशान की राख को एक-दूसरे पर मलते हैं और हवा में उड़ाते हैं। इस दौरान पूरी काशी शिवमय हो जाती है और हर तरफ हर-हर महादेव का नाद सुनाई देता है।

संकट हरनी मंगल करनी, कर दो बेडा पार(Sankat Harni Mangal Karni Kardo Beda Paar)

संकट हरनी मंगल करनी,
कर दो बेडा पार,

तेरे नाम का करम है ये सारा (Tere Naam Ka Karam Hai Ye Sara)

तेरे नाम का करम है ये सारा,
भक्तो पे छाया है सुरूर शेरावालिये,

नाम लेगा जो बजरंगबली का(Naam Lega Jo Bajrangbali Ka)

नाम लेगा जो बजरंगबली का,
कष्ट जीवन के सारे कटेंगे ॥

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