लंका में बज गया रे डंका श्री राम का(Lanka Mein Baj Gaya Re Danka Shree Ram Ka)

मैं माँ अंजनी का लाला श्री राम भक्त मतवाला,

मेरा सोटा चल गया रे बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे डंका श्री राम का ॥


मैं राम दूत बन आया सीता का पता लगाया,

तू अहंकार में अंधा तू ने अपना रौब जमाया,

बाहर अन्दर से काला करता रहा गड बड़ झाला,

मेरा सोटा चल गया रे बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे डंका श्री राम का ॥


मुझे जोर से भूख लगी थी सोचा थोड़े फल खालू,

ये सोच के पेड़ चढ़ा था इस पेड़ की आग बुझालू,

किया जम्बू ने घोटाला मेरे हाथ से छीना निवाला,

मेरा सोटा चल गया रे बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे डंका श्री राम का ॥


मैंने अक्षय को है मारा आ मेघनाथ ललकारा,

जब एक चली ना उसकी ब्रह्मास्त्र मुझ पे डारा,

ब्रह्मा का मान रख डाला में बंध गया बजरंग बाला,

मेरा सोटा चल गया रे बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे डंका श्री राम का ॥


फिर तू गुस्से में आया और मुझे खूब धमकाया,

मेरी पूँछ में आग लगाई ना ज्यादा समय गवाया,

वहाँ भड़की ऐसी ज्वाला लंका का हुआ दिवाला,

मेरा सोटा चल गया रे बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे डंका श्री राम का ॥


कहे भूलन लंक जलाई तेरी अकल में कुछ ना आई,

लंका विध्वंस करके अब लेट गया अनुयाई,

ना जपी राम की माला हो गया कुटुम्ब का गाला,

मेरा सोटा चल गया रे बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे डंका श्री राम का ॥

........................................................................................................
सालासर वाले तुम्हें, आज हम मनाएंगे (Salasar Wale Tumhe Aaj Hum Manayenge)

सालासर वाले तुम्हें,
आज हम मनाएंगे,

महाकाल तेरी भक्ति ने बवाल कर दिया (Mahakal Teri Bhakti Ne Bawal Kar Diya)

तेरे कलयुग में भी भक्तो ने कमाल कर दिया,
हो जय श्री महाकाल के नारे ने धमाल कर दिया,

क्या है वैदिक मंत्र?

दिक मंत्र सदियों से सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म का अभिन्न हिस्सा रहा हैं। ये मंत्र प्राचीन वैदिक साहित्य से उत्पन्न हुए हैं और इनका उल्लेख वेदों, उपनिषदों और अन्य धर्मग्रंथों में भी मिलता है।

वनदेवी की पूजा किस विधि से करें?

हिंदू धर्म में वनदेवी को जंगलों, वनस्पतियों, और वन्य जीवों की अधिष्ठात्री माना जाता है। वे प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का प्रतीक हैं। इतना ही नहीं, कई आदिवासी समुदायों में वनदेवी को आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने