मगन ईश्वर की भक्ति में (Magan Ishwar Ki Bhakti Me Are Mann Kiyon Nahin Hota)

मगन ईश्वर की भक्ति में,

अरे मन क्यों नहीं होता।

पड़ा आलस्य में मुर्ख,

रहेगा कब तलक सोता॥


जो इच्छा है तेरे कट जाएं,

सारे मैल पापों के।

प्रभु के प्रेम जल से,

क्यों नहीं अपने को तू धोता॥


विषय और भोग में फंस कर,

न बर्बाद कर तू अपने जीवन को।

दमन कर चित्त की वृत्ति,

लगा ले योग में गोता॥


नहीं संसार की वास्तु,

कोई भी सुख की हेतु है।

व्यथा इनके लिए फिर क्यों,

समय अनमोल तू खोता॥


ना पत्नी काम आएगी,

ना भाई-पुत्र और पोता।

धर्म ही एक ऐसा है,

जो साथी अंत तक होगा॥


भटकता क्यों फिरे नाहक,

तू सुख के लिए मूर्ख।

तेरे ह्रदय के भीतर ही बहे,

आनंद का श्रोता॥


मगन ईश्वर की भक्ति में,

अरे मन क्यों नहीं होता।

पड़ा आलस्य में मुर्ख,

रहेगा कब तलक सोता॥


........................................................................................................
श्याम तोपे रंग डाँरू: होली भजन (Shyam Tope Rang Daaru)

नेक आगे आ,
श्याम तोपे रंग डारुं,

मां के दिल जैसा दुनिया में कोई दिल नहीं

दिल दिल दिल दिल दिल..माँ का दिल
दिल दिल दिल..माँ का दिल दिल दिल

जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया(Jinka Maiya Ji Ke Charno Se Sabandh Hogaya)

जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने