मेरे राम इतनी किरपा करना, बीते जीवन तेरे चरणों में(Mere Ram Itni Kripa Karna Beete Jeevan Tere Charno Me)

मेरे राम इतनी किरपा करना,

बीते जीवन तेरे चरणों में ॥


मेरे राम मेरे घर आ जाना,

शबरी के बेर तुम खा जाना,

मुझे दर्शन अपने दिखा जाना,

मुझे मुक्ति मिले अपने कर्मो से,

मेरे राम इतनी कीरपा करना,

बीते जीवन तेरे चरणों में ॥


जब जनम लूँ मैं तेरी दासी बनु,

तेरी सेवा करूँ सन्यासी बनु,

हर जनम में मैं तेरी पूजा करूँ,

ना करना विमुख मेरे धर्मो से,

मेरे राम इतनी कीरपा करना,

बीते जीवन तेरे चरणों में ॥


बस इतनी हमपे दया करना,

नाम तेरा भजे मेरा मनवा,

नहीं दूर कभी हो तेरी सूरत,

प्रभु आन बसों मेरे नयनो में,

मेरे राम इतनी कीरपा करना,

बीते जीवन तेरे चरणों में ॥


भटके जब जीवन की नैया,

प्रभु पार लगाना बनके खिवैया,

जब दिखे ना कही मुझे उजियारा,

ले लेना अपने चरणों में,

मेरे राम इतनी कीरपा करना,

बीते जीवन तेरे चरणों में॥


मेरे राम इतनी किरपा करना,

बीते जीवन तेरे चरणों में ॥

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करवा चौथ व्रत कथा (Karva Chauth Vrat Katha)

एक साहूकार था जिसके सात बेटे और एक बेटी थी। सातों भाई व बहन एक साथ बैठकर भोजन करते थे। एक दिन कार्तिक की चौथ का व्रत आया तो भाई बोला कि बहन आओ भोजन करें।

अहोई अष्टमी का महत्व और मुहूर्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। यह व्रत माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन माताएं अपने पुत्रों की कुशलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए निर्जला व्रत करती हैं।

तेरी तुलना किससे करूं माँ(Teri Tulna Kisse Karu Maa)

तेरी तुलना किससे करूँ माँ,
तेरी तुलना किससे करूं माँ,

चैत्र माह की पौराणिक कथा

नवरात्रि का अर्थ नौ रातें होता है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है। उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र का खास महत्व है।

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