मेरी मैया चली, असुवन धारा बही(Meri Maiya Chali Ashuvan Dhara Bahi)

मेरी मैया चली,

असुवन धारा बही,

नौ दिन मैया ने,

बेटो की विपदा हरी,

मेरी मैया चलीं,

असुवन धारा बही ॥


सारे जगत की है महारानी,

भक्तों की श्रद्धा माता ने जानी,

दिल में है खलबली,

असुवन धारा बही,

मेरी मैया चलीं,

असुवन धारा बही ॥


मैया अतिथि बन कर आई,

जगमग दीपक ज्योत जलाई,

सब की बिगड़ी बनी,

असुवन धारा बही,

मेरी मैया चलीं,

असुवन धारा बही ॥


आज विदाई मैया की आई,

भक्तो ने महिमा मैया की गाई,

मन में ज्योत जली,

असुवन धारा बही,

मेरी मैया चलीं,

असुवन धारा बही ॥


दास की विनती सुनलो

सब की अर्जी माँ पूरी करदो,

रेवा के तीर चली,

असुवन धारा बही,

मेरी मैया चलीं,

असुवन धारा बही ॥


मेरी मैया चली,

असुवन धारा बही,

नौ दिन मैया ने,

बेटो की विपदा हरी,

मेरी मैया चलीं,

असुवन धारा बही ॥

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प्रभु रामचंद्र के दूता (Prabhu Ramachandra Ke Dootha)

प्रभु रामचंद्र के दूता,
हनुमंता आंजनेया ।

धूम मची है धूम माँ के दर (Dhoom Machi Hai Dhoom Maa Ke Dar)

धूम मची है धूम माँ के दर,
धूम मची है धूम ॥

हे ज्योति रूप ज्वाला माँ (Hey Jyoti Roop Jwala Maa)

हे ज्योति रूप ज्वाला माँ,
तेरी ज्योति सबसे न्यारी है ।

स्कंद षष्ठी व्रत कथा

स्कंद षष्ठी का व्रत हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2025 की पहली स्कन्द षष्ठी 05 जनवरी को मनाई जाएगी।

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