मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले (Meri Rasna Se Prabhu Tera Naam Nikle)

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले ॥


मन मंदिर में ज्योत जगाउंगी,

प्रभु सदा मैं तेरे गुण गाउंगी,

मेरे रोम रोम से तेरा नाम निकले,

मेरे रोम रोम से तेरा नाम निकले,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले,

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकलें,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले ॥


मेरे अवगुण चित्त से भुला देना,

मेरी नैया को पार लगा देना,

तेरी पूजा में जीवन तमाम निकले,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले,

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकलें,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले ॥


तेरी महिमा का सदा गुणगान करूँ,

तेरे वचनों का नित मैं ध्यान धरूँ,

तेरी भक्ति में सुबह और शाम निकले,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले,

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकलें,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले ॥


मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले,

हर घड़ी हर पल राम राम निकले ॥

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स्कंद षष्ठी व्रत की पौराणिक कथा

स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय जिन्हें मुरुगन, सुब्रमण्यम और स्कंद के नाम से भी जाना जाता है उनकी पूजा को समर्पित है। यह व्रत मुख्यतः दक्षिण भारत में मनाया जाता है। भगवान कार्तिकेय को युद्ध और शक्ति के देवता के रूप में पूजते हैं।

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जगत में कोई ना परमानेंट(Jagat Me Koi Na Permanent)

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