ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया (Odhoji Odho Dadi Mhari Bhi Chunariya)

ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,

म्हारी भी चुनरिया,

शान से ल्याया थारा,

टाबरिया थारा बालकिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


राचणी मेहंदी थारे,

हाथां में लगावा,

गजरो बनावा थारे,

जुड़े में सजावा,

फूल मंगाया बढ़िया बढ़िया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


दादी जी आओ थारे,

भोग लगावा,

हलवा पूड़ी मेवा का,

थाल सजावा,

खीर बनवाई दादी केसरिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


चुनड़ी ओढ़ाया म्हारो,

मान बढ़ेगो,

और भी थारो,

सिणगार खिलेगो,

‘सोनू’ सरावेगी या सारी दुनिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,

म्हारी भी चुनरिया,

शान से ल्याया थारा,

टाबरिया थारा बालकिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥

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अथ दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (Ath Durgadwatrishanmala)

श्री दुर्गा द्वात्रिंशत नाम माला" देवी दुर्गा को समर्पित बत्तीस नामों की एक माला है। यह बहुत ही प्रभावशाली स्तुति है। मनुष्य सदा किसी न किसी भय के अधीन रहता है।

आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना (Aaj Hai Jagrata Mai Ka Maa Ko Mana Lena)

आज है जगराता माई का,
माँ को मना लेना,

सकट चौथ व्रत कथा

सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ करना भी अनिवार्य माना जाता है। ऐसा करने से व्रतधारी को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं।

महाशिवरात्रि व्रत विधि

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों मे एक है। यह पर्व भगवान शिव की आराधना को समर्पित होता है और फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

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