सत्संगति से प्यार करना सीखोजी(Sat Sangati Se Pyar Karana Sikho Ji)

सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी


सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी


तन धन दाम संग ना जावयए

सुत दारा कोई काम ना आवये - x2


ममता का संघार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

॥ सत्संगति से प्यार करना...॥


यह जाग मोहनी नीद का सपना

नही कोई गैर नही कोई अपना

सत्य असत्य विचार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

॥ सत्संगति से प्यार करना...॥


हरि का भजन नित्य प्रति कीजे

अंतःकरण शुद्ध कर लीजे

आत्म साक्ष करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

॥ सत्संगति से प्यार करना...॥


भिक्षु कहे सुनो मन मेरो

नर तन भव भरिढ़ कहु बेरो

भव से बेड़ा पार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

॥ सत्संगति से प्यार करना...॥


सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

सत्संगति से प्यार करना सीखोजी

जीवन का उद्धार करना सीखोजी

........................................................................................................
विनती सुनलो मेरे गणराज (Vinti Sun Lo Mere Ganraj)

विनती सुनलो मेरे गणराज आज भक्ति क़ा फल दीजिये,
पहले तुमको मनाता हूँ मै देवा कीर्तन सफल कीजिए ॥

मेरी वैष्णो मैया, तेरी महिमा अपरम्पार (Meri Vaishno Maiya Teri Mahima Aprampar)

मेरी वैष्णो मैया,
तेरी महिमा अपरम्पार,

जय हों तेरी गणराज गजानन (Jai Ho Teri Ganraj Gajanan)

प्रथमें गौरा जी को वंदना,
द्वितीये आदि गणेश,

रुक्मिणी अष्टमी की कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। देवी रुक्मिणी मां लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक थीं।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।