सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे(Satguru Mere Kalam Hath Tere)

सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

मैं वारि मैं वारि वारि जावा,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

मैं वारि मैं वारि वारि जावा,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

हत्था ते लिख दे सेवा गुरा दी,

सेवा गुरा दी सेवा गुरा दी,

सेवा करदी कदे वी ना थका,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

मैं वारि मैं वारि वारि जावा,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


पैरा च लिख दे सत्संग जाना,

सत्संग जाना सत्संग जाना,

सत्संग जांदी कदे वी ना थका,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

मैं वारि मैं वारि वारि जावा,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


अखा च लिख दे दर्शन प्यारे,

दर्शन प्यारे दर्शन प्यारे,

दर्शन करदी कदे वी ना थका,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

मैं वारि मैं वारि वारि जावा,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


स्वासा च लिख दे नाम गुरा दा,

नाम गुरा दा नाम गुरा दा,

नाम जपदी कदे वी ना थका,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,


सतगुरु मेरे कलम हाथ तेरे,

के सोहने सोहने लेख लिख दे,

मैं वारि मैं वारि वारि जावा,

के सोहने सोहने लेख लिख दे

........................................................................................................
हरियाली तीज (Hariyali Teej)

हरियाली तीज, जिसे श्रावण तीज के नाम से भी जाना जाता है, एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो भारत और नेपाल में मनाया जाता है। हरियाली तीज का अर्थ है "हरियाली की तीज" या "हरित तीज"। यह नाम इसलिए पड़ा है क्योंकि यह त्योहार मानसून के मौसम में मनाया जाता है, जब प्रकृति में हरियाली का प्रवेश होता है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर जुलाई या अगस्त में पड़ती है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का विधान है।

गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa)

प्रथम वंदनीय गणेशजी को समर्पित मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व है।

शिव मात पिता, शिव बंधू सखा (Shiv Maat Pita Shiv Bandhu Sakha)

शिव मात पिता,
शिव बंधू सखा,

संतान सप्तमी 2024: जानें क्यों मनाई जाती है संतान सप्तमी और क्या है इस व्रत का शुभ मुहूर्त और महत्व

बात चाहे पति की लम्बी उम्र के लिए हरतालिका तीज और करवा चौथ का व्रत रखने की हो या फिर बच्चों के सुखी जीवन के लिए संतान सप्तमी के व्रत की, सनातन संस्कृति में मातृशक्ति ऐसे कई सारे व्रत धारण किए हुए हैं जो जगत कल्याण का आधार माना जाता है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने