शरण में आये हैं हम तुम्हारी (Sharan Mein Aaye Hain Hum Tumhari)

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।

सम्हालो बिगड़ी दशा हमारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।


न हम में बल है,

न हम में शक्ति ।

न हम में साधन,

न हम में भक्ति ।

तुम्हारे दर के हैं हम भिखारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।


प्रदान कर दो महान शक्ति,

भरो हमारे में ज्ञान भक्ति ।

तभी कहाओगे ताप हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।


जो तुम पिता हो, तो हम हैं बालक ।

जो तुम हो स्वामी, तो हम हैं सेवक ।

जो तुम हो ठाकुर, तो हम पुजारी ।

दया करो हे दयालु भगवन ।

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।


भले जो हैं हम, तो हैं तुम्हारे ।

बुरे जो हैं हम, तो हैं तुम्हारे ।

तुम्हारे हो कर भी हम दुखारी ।

दया करो हे दयालु भगवन ।

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।


शरण में आये हैं हम तुम्हारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।

सम्हालो बिगड़ी दशा हमारी,

दया करो हे दयालु भगवन ।

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प्रदोष व्रत के फायदे

प्रदोष व्रत त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। इसलिए, इसे त्रयोदशी के नाम से भी जानते हैं। प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है।

नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ(Nache Nandlal Nachave Hari Ki Maiya)

नाचे नन्दलाल,
नचावे हरि की मईआ ॥

स्कन्द षष्ठी पूजा विधि और उपाय

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