नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ(Nache Nandlal Nachave Hari Ki Maiya)

नाचे नन्दलाल,

नचावे हरि की मईआ ॥


नचावे हरि की मईआ,

नचावे हरि की मईआ ।

नाचे नन्दलाल,

नचावे हरि की मईआ ॥

मथुरा मे हरि, जन्म लियो है ॥

गोकुल मे पग, धरो री कन्हैया॥

रुनुक-झुनुक पग, घुँघरू वाज़े ॥

ठुमुक-ठुमुक पग, धरो री कन्हैया॥ ...x2

॥ नाचे नन्दलाल...॥


धोतो न बांधे, जामो न पहिरे ॥

पिताम्बर को, बडो रे पहरैया॥

टोपो न ओढ़े लाला, फेंटा* न बांधे ॥

मोर-मुकुट को, बडो रे ओढैईया॥ ...x2

॥ नाचे नन्दलाल...॥


शाला न ओढ़े, दुशाला ना ओढ़े ॥

काली रे कमरिया को, बडो रे ओढैईया॥

ढूध न भावे, दही ना खावे ॥

माखन-मिसरी को, बड़ो रे खवैईया॥...x2

॥ नाचे नन्दलाल...॥


खेल ना खेले, खिलौना ना खेले ॥

बंसी को लाला, बडो री बजीईया ॥

चंदर सखी भज, बालकृष्ण छवि ॥

हंस हंस कंठ लगावे, हर की मैया ॥ ...x2

॥ नाचे नन्दलाल...॥


नाचे नन्दलाल,

नचावे हरि की मईआ ॥

नचावे हरि की मईआ,

नचावे हरि की मईआ ।

नाचे नन्दलाल,

नचावे हरि की मईआ ॥

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होता है सारे विश्व का, कल्याण यज्ञ से (Hota Hai Sare Vishwa Ka Kalyan Yajya Se)

होता है सारे विश्व का,
कल्याण यज्ञ से ।

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झूलन चलो हिंडोलना, वृषभान नंदनी,
झूलन चलो हिडोलना, वृषभान नंदनी।

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इतनी किरपा कीजिये
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आश्विन मास शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी (Ashvin Maas Shukla Paksh Ki Paapaankusha Ekaadashi)

युधिष्ठिर ने फिर पूछा-जनार्दन ! अब आप कृपा कर आश्विन शुक्ल एकादशी का नाम और माहात्म्य मुझे सुनाइये। भगवान् कृष्ण बोले राजन् !

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