श्याम नज़रें देख लो, अब खोल के: भजन (Shyam Nazare Dekh Lo Ab Khol Ke)

दिल दिया छोटा सा,
तुमने साँवरे,
उससे ज्यादा सह चुका हूँ,
घाव रे,
हर कोई चल देता,
इसको तोड़ के,
चरणों में रखा कलेजा,
खोल के,
श्याम नजरे देख लो,
अब खोल के ॥

दर्द बहता अखियों के,
जरिये मेरा,
ये खजाना कीमती,
सबसे मेरा,
मोल इसका लग सके,
ना तोल के,
चरणों में रखा कलेजा,
खोल के,
श्याम नजरे देख लो,
अब खोल के ॥

पिघलो भगवन तुम,
दया दृष्टि करो,
अब ‘कमल’ के श्याम,
तुम दुखड़े हरो,
बैठो ना मुंह को प्रभुजी,
मोड़ के,
चरणों में रखा कलेजा,
खोल के,
श्याम नजरे देख लो,
अब खोल के ॥

श्याम नज़रें देख लो,
अब खोल के,
चरणों में रखा कलेजा,
खोल के,
श्याम नजरे देख लो,
अब खोल के ॥

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कब है रुक्मिणी अष्टमी?

हिंदू धर्म में पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पर ही द्वापर युग में विदर्भ के महाराज भीष्मक के यहां देवी रुक्मिणी जन्मी थीं।

भूतड़ी अमावस्या के उपाय

चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। यह तिथि पितृ तर्पण, श्राद्ध और खास उपायों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल (Jai Ho Jai Ho Teri Maa Yashoda Ke Lal)

जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल,
ले के अवतार आना गज़ब हो गया,

दीपावली पूजन के लिए संकल्प मंत्रः (Dipawali Pujan ke liye Sankalp Mantra)

ऊं विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ऊं तत्सदद्य श्री पुराणपुरुषोत्तमस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय पराद्र्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे सप्तमे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बुद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गत ब्रह्मवर्तैकदेशे पुण्य

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