तेरी जय हों जय हों, जय गोरी लाल(Teri Jay Ho Jay Ho Jay Gauri Lal)

तेरी जय हो जय हो,

जय गोरी लाल ॥


        दोहा 

हे जग दाता विश्व विधाता,

हे गणपति जी महाराज,

हे शिव सूत गौरी के लाला,

मेरे पूरण करियो काज ॥


तेरी जय हो जय हो,

जय गोरी लाल,

पूजू तेरा नाम,

करो सबको निहाल,

तेरी जय हों जय हों,

जय गोरी लाल ॥


पान फूल चढ़े चढ़ता है मेवा,

सारा जगत तेरी करता है सेवा,

भोग लगाऊं,

लेकर लड्डुओं का थाल,

तेरी जय हों जय हों,

जय गोरी लाल ॥


गणपत मेरे काज सवारो,

भरी सभा में आन पधारो,

भक्तों को कर देता तू मालामाल,

तेरी जय हों जय हों,

जय गोरी लाल ॥


राजू भी हरिपुरिया आए,

शुभम तिलकधारी गुण गाये,

सारे ही देता है संकट तू टाल,

तेरी जय हों जय हों,

जय गोरी लाल ॥


तेरी जय हों जय हों,

जय गोरी लाल,

पूजू तेरा नाम,

करो सबको निहाल,

तेरी जय हों जय हों,

जय गोरी लाल ॥

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खाटू वाले श्याम हमारे(Khatu Wale Shyam Hamare)

खाटू वाले श्याम हमारे,
भक्तों के तू काज संवारे,

कुंभ संक्रांति शुभ योग

आत्मा के कारक सूर्य देव हर महीने अपना राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान किया जाता है।

राधा कौन से पुण्य किये तूने(Radha Kon Se Punya Kiye Tune)

राधा कौन से पुण्य किये तूने,
जो हरि रोज तेरे घर आते हैं ॥

गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं (Gopal Gokul Valbhe Priya Gop Gosut Valbham)

गोपाल गोकुल वल्लभे,
प्रिय गोप गोसुत वल्लभं ।

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