उठ जाग मुसाफिर भोर भई (Bhajan: Uth Jag Musafir Bhor Bhai)

उठ जाग मुसाफिर भोर भई,

अब रैन कहाँ जो सोवत है ।

जो सोवत है सो खोवत है,

जो जागत है सोई पावत है ॥


उठ नींद से अखियाँ खोल जरा,

और अपने प्रभु में ध्यान लगा ।

यह प्रीत करन की रीत नहीं,

प्रभु जागत है तू सोवत है ॥


उठ जाग मुसाफिर भोर भई,

अब रैन कहाँ जो सोवत है ।

जो सोवत है सो खोवत है,

जो जगत है सोई पावत है ॥


जो कल करना सो आज कर ले,

जो आज करे सो अब कर ले ।

जब चिड़िया ने चुग खेत लिया,

फिर पछताए क्या होवत है ॥


उठ जाग मुसाफिर भोर भई,

अब रैन कहाँ जो सोवत है ।

जो सोवत है सो खोवत है,

जो जगत है सोई पावत है ॥


नादान भुगत अपनी करनी,

ऐ पापी पाप में चैन कहाँ ।

जब पाप की गठड़ी शीश धरी,

अब शीश पकड़ क्यूँ रोवत है ॥


उठ जाग मुसाफिर भोर भई,

अब रैन कहाँ जो सोवत है ।

जो सोवत है सो खोवत है,

जो जगत है सोई पावत है ॥

........................................................................................................
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर करें ये उपाय

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, स्नान-दान और भगवान की आराधना करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं।

सर्पों की देवी मनसा की पूजा कैसे करें?

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे झारखंड के कसमार प्रखंड सहित आसपास के गांवों में सर्पों की देवी मां मनसा की पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। हर साल गांवों में जगह-जगह मां मनसा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है।

भोले बाबा तेरे दरबार में जो आते हैं (Bhole Baba Tere Darbar Mein Jo Aate Hai)

भोले बाबा तेरे दरबार में जो आते है ॥

दादी चरणों में तेरे पड़ी, मैया (Dadi Charno Mein Tere Padi Maiya)

दादी चरणों में तेरे पड़ी,
मैया तुझको निहारूं खड़ी,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने