भोले नाथ का मैं बनजारा (Bholenath Ka Main Banjara)

भोले नाथ का मैं बनजारा,

छोड़ दिया मैंने जग सारा,

पता बता दो नील कंठ का,

पता बता दो नील कंठ का,

मैं जाऊ शिव धाम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हु सवाली,


भटक रहा हूँ जंगल जंगल,

छोड़ दिया है मैंने अनजल,

जब तक भोले नहीं मिलेगे,

करू नहीं आराम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हूँ सवाली,


शिव सेवक हूँ मैं मतवाला,

बाबा मेरा देव निराला,

ढुंडत ढुंडत शिवशंकर को,

ढुंडत ढुंडत शिवशंकर को,

सुबह से हो गई शाम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हूँ सवाली,


यो भी मिला है मुझे हाथ से,

काम करूँगा दोनों हाथ से,

पैरो की उपकार में उसका,

पैरो की उपकार में उसका,

मानूँगा आठो याम ,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हूँ सवाली,


भोले नाथ का मैं बनजारा,

छोड़ दिया मैंने जग सारा,

पता बता दो नील कंठ का,

पता बता दो नील कंठ का,

मैं जाऊ शिव धाम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हु सवाली,

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मां दुर्गा पूजा विधि

पहले बतलाये नियमके अनुसार आसनपर प्राङ्घख बैठ जाय। जलसे प्रोक्षणकर शिखा बाँधे ।

अगहन को मार्गशीर्ष क्यों कहते हैं

मार्गशीर्ष मास धर्म, भक्ति और ज्योतिषीय महत्व से परिपूर्ण एक विशिष्ट मास माना जाता है। यह मास भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और इसे अत्यंत शुभ भी माना जाता है।

मकर संक्रांति पर अद्भुत संयोग

मकर संक्रांति के साथ ही खरमास का समापन होता है। जो इसे और भी शुभ बनाता है। इस दिन मांगलिक कार्य, निवेश और खरीदारी के लिए समय अनुकूल है।

ललिता देवी मंदिर शक्तिपीठ

मां ललिता देवी का मंदिर देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर 88 हजार ऋषियों की तपस्थली, वेदों और पुराणों की रचना स्थली नैमिषारण्य में स्थित है। मां ललिता देवी को त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है।

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