देकर शरण अपनी अपने में समा लेना(Dekar Sharan Apani Apne Mein Sama Lena)

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना ॥


कही धरती डोले है कही अंबर है बरसे,

तुमसे मिलने को भोले मिलने ना दे करते,

मुश्किल बड़ी राहें है रस्ता भी दिखा देना,

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना ॥


दर दर क्यों भटकु मैं कुछ मुझमे कमी होगी,

अपनी सेवक रखलो कदमो में जमीन होगी,

हलातों से लड़ लड़कर जीना भी सीखा देना,

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना ॥


जब भी पुकारू मैं तुमको तुम्हे आना ही होगा,

इतनी विनती है मेरी तुम्हे पार लगाना होगा,

जैसी हु तेरी हु चरणों में जगह देना,

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना ॥

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हे दयामय आप ही संसार के आधार हो (Hey Dayamay Aap Hi Sansar Ke Adhar Ho)

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो।
आप ही करतार हो हम सबके पालनहार हो॥

क्यों मनाई जाती है मत्स्य द्वादशी?

मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाने वाली मत्स्य द्वादशी भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की जयंती के रूप में मनाई जाती है।

राम नवमी 2025 शुभ योग

राम नवमी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभ श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

भजन करो मित्र मिला आश्रम नरतन का (Bhajan Karo Mitra Mila Ashram Nartan Ka)

बैठ के तु पिंजरे में,
पंछी काहे को मुसकाय,

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