दिया थाली बिच जलता है(Diya Thali Vich Jalta Hai)

दिया थाली बिच जलता है,

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥

दिया थाली बिच जलता है ।

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥


माँ के माथे पे टीका है,

माँ की बिंदिया ऐसे चमके,

जैसे चाँद चमकता है ॥

दिया थाली बिच जलता है ।

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥


माँ के गले में हरवा है,

माँ के झुमके ऐसे चमकें,

जैसे चाँद चमकता है ॥

दिया थाली बिच जलता है ।

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥


माँ के हाथों में चूड़ियां है,

माँ के कंगन, मेंहदी ऐसे चमके

जैसे चाँद चमकता है ॥

दिया थाली बिच जलता है ।

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥


मां के पैरों में पायल हैं,

मां के बिछुए ऐसे चमके,

जैसे चाँद चमकता है ॥

दिया थाली बिच जलता है ।

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥


माँ के अंग पे साड़ी है,

माँ की चुनरी ऐसे चमके,

जैसे चाँद चमकता है ॥

दिया थाली बिच जलता है ।

ऊपर माँ का भवन बना,

नीचे गंगा जल बहता है ॥

........................................................................................................
श्री रानीसती चालीसा (Sri Rani Sati Chalisa)

श्री गुरु पद पंकज नमन, दुषित भाव सुधार I
राणी सती सू विमल यश, बरणौ मति अनुसार II

देवी दुर्गा की 10 महाविद्या की साधना

हिंदू वैदिक पंचाग के अनुसार, 30 जनवरी 2025 से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। हिंदू धर्म में हर साल 4 नवरात्रि मनाई जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ माह की गुप्त नवरात्रि अंतिम नवरात्रि होती है।

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना (Mujhe Ras Agaya Hai Tere Dar Pe Sar Jhukana)

मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना ।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने