हे शेरावाली नजर एक कर दो(Hey Sherawali Nazar Ek Kar Do)

हे शेरावाली नजर एक कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो,

अपने ही रंग में मेरा चोला रंग दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


तेरे सिवा ना मुझे कुछ भी भाए,

देखूं जिधर भी नज़र तू ही आए,

मुझको दीवाना कर इस कदर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


रूठे भले माँ ये सारा जमाना,

हे जग की मालिक ना तुम रूठ जाना,

सिर पे तू मेरे माँ हाथ धर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


दे दो मुझे भीख में अपनी भक्ति,

चढ़ के ना उतरे माँ दो ऐसी मस्ती,

फैलाए कबसे खड़ा झोली भर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


सोए जगा दो हे माँ भाग्य मेरे,

गाता रहूं बस भजन मैया तेरे,

‘राजू’ को मैया बस इतना वर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


हे शेरावाली नजर एक कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो,

अपने ही रंग में मेरा चोला रंग दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥

........................................................................................................
राजीव लोचन राम, आज अपने घर आए (Rajiv Lochan Ram Aaj Apne Ghar Aaye)

राजीव लोचन राम,
आज अपने घर आए,

बुधवार की पूजा विधि

हिंदू धर्म में बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है, और बुधवार को उनका पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।

प्रदोष व्रत के नियम

शनि प्रदोष का दिन भगवान भोलेनाथ के साथ शनिदेव की पूजा-आराधना के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन शनिदेव और शिवजी की पूजा करने से जीवन के समस्त दुखों से छुटकारा मिलता है और शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा समेत अन्य परेशानियां भी दूर होती है।

शनि प्रदोष व्रत उपाय

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और शनिदेव के आराधना के लिए समर्पित होता है। शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आने वाले इस व्रत में शिवलिंग की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।