हम आये है तेरे द्वार, गिरजा के ललना (Hum Aaye Hai Tere Dwar Girija Ke Lalna)

हम आये है तेरे द्वार,

गिरजा के ललना,

हो देवो के सरदार,

गिरजा के ललना,

करने दीदार दीदार दीदार,

दीदार गिरजा के ललना,

अरे दे ताली दे ताली नाचे रे,

सब भक्त तेरे अंगना,

हम आये हैं तेरे द्वार,

गिरजा के ललना ॥


लंबोदर गजबदन गजानन,

लाये खुशहाली,

महक उठे वन उपवन खेतन,

आई हरियाली,

अरे झूम झूम के भगता तेरी,

करते वंदना,

अरे दे ताली दे ताली नाचे रे,

सब भक्त तेरे अंगना,

हम आये हैं तेरे द्वार,

गिरजा के ललना ॥


तीजा रही उपासी गौरा,

सह के कठिन कलेश,

लगत चौथ चंदा के नाईं,

पूजे गौर गणेश,

अरे लालन बनके महा शक्ति के,

झूले झूलना,

अरे दे ताली दे ताली नाचे रे,

सब भक्त तेरे अंगना,

हम आये हैं तेरे द्वार,

गिरजा के ललना ॥


घर घर मे तुम आये गणपति,

हो रही जय जयकार,

ये ‘बेनाम’ खड़ा कर जोरे,

ले फूलन के हार,

अपने इस ‘संदीप’ को गणपति,

दाता न भूलना,

अरे दे ताली दे ताली नाचे रे,

सब भक्त तेरे अंगना,

हम आये हैं तेरे द्वार,

गिरजा के ललना ॥


हम आये है तेरे द्वार,

गिरजा के ललना,

हो देवो के सरदार,

गिरजा के ललना,

करने दीदार दीदार दीदार,

दीदार गिरजा के ललना,

अरे दे ताली दे ताली नाचे रे,

सब भक्त तेरे अंगना,

हम आये हैं तेरे द्वार,

गिरजा के ललना ॥

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गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa)

प्रथम वंदनीय गणेशजी को समर्पित मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व है।

वो काला एक बांसुरी वाला (Wo Kala Ek Bansuri Wala)

वो काला एक बांसुरी वाला,
सुध बिसरा गया मोरी रे ।

तेरे मन में राम, तन में राम (Tere Mann Mein Ram Tan Mein Ram)

तेरे मन में राम,
तन में राम ॥

जानकी जयंती पर सीता चालीसा का पाठ

हिंदू धर्म में भगवान राम और माता सीता की पूजा बहुत शुभ और कल्याणकारी मानी गई है। देवी सीता को जानकी के नाम से भी जाना जाता है, वे जगत जननी मां लक्ष्मी का स्वरूप हैं।

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