कैंलाश शिखर से उतर कर (Kailash Shikhar Se Utar Kar)

कैलाश शिखर से उतर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर ॥


आ गए है प्रभु गौरा मैया के संग,

आ गए है प्रभु गौरा मैया के संग,

मनभावन रूप ये धर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर,

कैंलाश शिखर से उतर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर ॥


पुत्र कार्तिक गणेश भी संग आए है,

पुत्र कार्तिक गणेश भी संग आए है,

रिद्धि सिद्धि को साथ में ले कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर,

कैंलाश शिखर से उतर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर ॥


थाल तुम आरती का सजाओ सखी,

थाल तुम आरती का सजाओ सखी,

सभी मंगल गाओ मिल कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर,

कैंलाश शिखर से उतर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर ॥


आज इच्छा होगी सबके दिल की पूरी,

आज इच्छा होगी सबके दिल की पूरी,

पाएंगे दर्शन जी भर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर,

कैंलाश शिखर से उतर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर ॥


कैलाश शिखर से उतर कर,

मेरे घर आए है भोले शंकर ॥

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बसंत पंचमी पर किस दिशा में करें पूजा

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। वहीं इस साल बसंत पंचमी 02 फरवरी को मनाया जाएगा।

उलझ मत दिल बहारो में 2 (Ulajh Mat Dil Bharo Me -2)

उलझ मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या,
सहारे छुट जाते है सहरो का बरोसा क्या

हमने आँगन नहीं बुहारा (Hamne Aangan Nahi Buhara, Kaise Ayenge Bhagwan)

हमने आँगन नहीं बुहारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ।

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय(Govind Jai Jai, Gopal Jai Jai)

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय
राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥

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