मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो (Maiya Mori Mai Nahi Makhan Khayo)

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ।


भोर भयो गैयन के पाछे,

मधुवन मोहिं पठायो ।

चार पहर बंसीबट भटक्यो,

साँझ परे घर आयो ॥


मैं बालक बहिंयन को छोटो,

छींको किहि बिधि पायो ।

ग्वाल बाल सब बैर परे हैं,

बरबस मुख लपटायो ॥


तू जननी मन की अति भोरी,

इनके कहे पतिआयो ।

जिय तेरे कछु भेद उपजि है,

जानि परायो जायो ॥


यह लै अपनी लकुटि कमरिया,

बहुतहिं नाच नचायो ।

सूरदास तब बिहँसि जसोदा,

लै उर कंठ लगायो ॥

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देव गुरु बृहस्पति की पूजा विधि?

हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित है। उसी प्रकार, गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति देव का दिन होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से बृहस्पति की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

सुन मेरी मात मेरी बात (Sun Meri Maat Meri Baat)

सुन मेरी मात मेरी बात,
छानी कोणी तेरे से,

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश(Mhane Jambhoji Diyo Upadesh)

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश,
भाग म्हारो जागियो ॥

मेरे बालाजी सरकार मैं तेरा हो जाऊँ (Mere Balaji Sarkar Main Tera Ho Jaun)

शिव शंकर के अवतार,
मेरे बालाजी सरकार,

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