मेरा श्याम बड़ा अलबेला (Mera Shyam Bada Albela)

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,


कभी गंगा के तीर,

कभी यमुना के तीर,

कभी गंगा के तीर,

कभी यमुना के तीर,

कभी सरयू में नहाये अकेला,

कभी सरयू में नहाये अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी गोपियों के संग,

कभी ग्वालों के संग,

कभी गोपियों के संग,

कभी ग्वालों के संग,

कभी गउवे चराये अकेला,

कभी गउवे चराये अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी भामा के संग,

कभी रुक्मणि के संग,

कभी भामा के संग,

कभी रुक्मणि के संग,

कभी राधा के संग अकेला,

कभी राधा के संग अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी सूरज के संग,

कभी चंदा के संग,

कभी सूरज के संग,

कभी चंदा के संग,

कभी तारो से खेले अकेला,

कभी तारो से खेले अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी संतों के संग,

कभी भक्तों के संग,

कभी संतों के संग,

कभी भक्तों के संग,

कभी मस्ती में बैठा अकेला,

कभी मस्ती में बैठा अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,


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शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा (Shankar Teri Jata Se Behti Hai Gang Dhara)

शंकर तेरी जटा से,
बहती है गंग धारा

देवता भी स्वार्थी थे, दौड़े अमृत के लिए (Dewata Bhi Swarthi The, Daude Amrat Ke Liye)

देवता भी स्वार्थी थे,
दौड़े अमृत के लिए,

क्या है शनि प्रदोष व्रत

सनातन धर्म में भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना के लिए प्रदोष व्रत का काफ़ी खास माना गया है। प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे, शारदा माँ का डेरा है (Unche Unche Parvat Pe Sharda Maa Ka Dera Hai)

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे,
शारदा माँ का डेरा है,

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