मेरी शेरावाली मां, बदलती तकदीरे (Meri Sherawali Maa Badalti Takdire)

कभी जल्दी जल्दी,

कभी धीरे धीरे,

मेरी शेरावाली माँ,

बदलती तकदीरे ॥


कहते है कोई बदल ना पाता,

है हाथों की रेखा,

पर ये करिश्मा हमने माँ को,

रोज ही करते देखा,

तभी तो ये दुनियाँ,

दीवानी इसकी रे,

मेरी शेरावाली मां,

बदलती तकदीरे ॥


दीन दुखी लाखों ही आते,

मैया जी के द्वारे,

बारी बारी से मेरी मैया,

सबके काज संवारे,

यहाँ पर तो भरती,

झोलियाँ सब की रे,

मेरी शेरावाली मां,

बदलती तकदीरे ॥


अगर भरोसा सच्चा हो तो,

काम बने एक पल में,

देर उन्ही को लगती जिनके,

शंका रहती मन में,

कहे ‘सोनू’ रखो,

भावना सच्ची रे,

मेरी शेरावाली मां,

बदलती तकदीरे ॥


कभी जल्दी जल्दी,

कभी धीरे धीरे,

मेरी शेरावाली माँ,

बदलती तकदीरे ॥

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अम्बा माई उतरी हैं बाग में हो मां (Amba Mai Utari Hai Baag Me)

अम्बा माई उतरी हैं बाग में हो मां।
(मैय्या, अम्बा माई उतरी हैं बाग में हो मां।)

षटतिला एकादशी के मंत्र

25 जनवरी 2025 को षटतिला एकादशी का व्रत है। इस दिन तिल का काफी महत्व होता है। षटतिला एकादशी के दिन तिल का छह तरीकों से प्रयोग किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में भी विशेष रूप से तिल का इस्तेमाल किया जाता है।

मोरी मैया महान(Mori Maiya Mahan)

मोरी मैया महान,
मोरी मईया महान,

बच्छ बारस शुभ मूहूर्त, पूजा विधि (Bachh Baras Shubh Muhrat, Puja Vidhi)

बच्छ बारस जिसे गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है। ये पर्व आगामी 28 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।

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