मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए (Mujhe Tera Sahara Sada Chahiye)

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,

मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥


चाँद तारे फलक पर दिखे ना दिखे,

मुझ को तेरा नज़ारा सदा चाहिए,

धन दौलत जहाँ की मिले ना मिले,

सतगुरु तेरे चरणों की रज चाहिए ॥


यहाँ खुशिया हैं कम, और ज्यादा है गम,

जहाँ देखो वहीँ है देखो भरम ही भरम,

मेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले,

मेरे दिल में उजाला तेरा चाहिए ॥


कभी वैराग है, कभी अनुराग है,

यहाँ बदले हैं माली वही बाग़ है,

मेरी चाहत की दुनिया बसे ना बसे,

मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए ॥


मेरी धीमी है चाल, और पथ है विशाल,

हर कदम पर मुसीबत अब तू ही संभाल,

पैर मेरे थकें हैं, चले ना चले,

मेरे दिल में इशारा तेरा चाहिए ॥


कभी बैराग है, कभी अनुराग है,

जिन्दगी बिन धुंए की अजब आग है,

मान सम्मान जग में मिले ना मिले,

बस कृपा होनी बाबा तेरी चाहिए ॥


आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,

मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥


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दया करो हे दयालु गणपति (Daya Karo Hey Dayalu Ganpati)

शरण में आये है हम तुम्हारी,
दया करो हे दयालु गणपति,

मेरे सरकार का, दीदार बड़ा प्यारा है(Mere Sarkar Ka Didar Bada Pyara Hai)

मेरे सरकार का,
दीदार बड़ा प्यारा है ।

हाथ जोड़ विनती करू तो सुनियो चित्त लगाये - विनती भजन (Shyam Puspanjali Shri Khatu Shyamji Vinati)

हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय,
दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज,

ज्वारे और अखंड ज्योत की परंपरा

तैत्तिरीय उपनिषद में अन्न को देवता कहा गया है- अन्नं ब्रह्मेति व्यजानत्। साथ ही अन्न की निंदा और अवमानना ​​का निषेध किया गया है- अन्नं न निन्द्यात् तद् व्रत। ऋग्वेद में अनेक अनाजों का वर्णन है I

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