प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो (Prabhuji More Avgun Chit Naa Dharo)

प्रभुजी मोरे/मेरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।


एक लोहा पूजा मे राखत,

एक घर बधिक परो ।

सो दुविधा पारस नहीं देखत,

कंचन करत खरो ॥

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो..


प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।


एक नदिया एक नाल कहावत,

मैलो नीर भरो ।

जब मिलिके दोऊ एक बरन भये,

सुरसरी नाम परो॥

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो..


प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।


एक माया एक ब्रह्म कहावत,

सुर श्याम झगरो ।

अब की बेर मुझे पार उतारो,

नही पन जात तरो ॥

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो..


प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।

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विधाता तू हमारा है - प्रार्थना (Vidhata Tu Hamara Hai: Prarthana)

विधाता तू हमारा है,
तू ही विज्ञान दाता है ।

प्रदोष व्रत की कथा (Pradosh Vrat Ki Katha )

प्राचीनकाल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था। उस पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पुत्र को साथ लेकर भीख मांगती हुई शाम तक घर वापस आती थी।

ओढ़ चुनरियाँ मैया लाल चली (Odh Chunariya Maiya Lal Chali)

ओढ़ चुनरियाँ मैया लाल चली,
सिंघ सवारी पे है लगती भली ॥

सबसे पहले गजानन मनाया तुम्हें (Sabse Pahle Gajanan Manaya Tumhe)

सबसे पहले गजानन मनाया तुम्हे,
तेरा सुमिरण करे आज आ जाइये,

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