रम गयी माँ मेरे रोम रोम में (Ram Gayi Maa Mere Rom Rom Main)

रम गयी माँ मेरे रोम रोम में,

रम गयी माँ मेरे रोम रोम में

रम गयी माँ मेरे रोम रोम में,

रम गयी माँ मेरे रोम रोम में


मेरी सांसो में अम्बे के नाम की धारा बहती

इसीलिए तो मेरी जिह्वा हर समय ये कहती

॥ रम गयी माँ मेरे रोम रोम में ॥


जहा भी जाऊ, जिधर भी देखू

जहा भी जाऊं, जिधर भी देखू


अष्टभुजी माता के, ये रंग ऐसा जिसके

आगे और सभी रंग फीके भक्तो

और सभी रंग फीके भक्तो,

और सभी रंग फीके भक्तो


आंधी आये तूफ़ान आया,

पर ना भरोसा ना डोला

नाम दीवाना भक्त जानू,

यही झूम के बोला

॥ रम गयी माँ मेरे रोम रोम में ॥


दुःख सुख भक्तो, इस जीवन को

दुःख सुख भक्तो, इस जीवन को,

एक बराबर लागे

मंन में माँ की ज्योति जगी है,

इधर उधर क्यों भागे

इधर उधर क्यों भागे,

इधर उधर क्यों भागे


सपने में जब वैष्णों माँ ने,

अध्भुत रूप दिखाया

मस्ती में बावरे हो कर श्रीधर ने फरमाया

॥ रम गयी माँ मेरे रोम रोम में ॥


मंन चाहे अब, मंन चाहे अब

माँ के दर का मैं सेवक बनजाऊ

माँ के भक्तो की सेवा में सारी उम्र बिताओ

सारी उम्र बिताओ,

सारी उम्र बिताओ


छिन्न मस्तिका चिंता हरणी नैनन बीच समायी

मस्ताना हो भाई दास ने ये ही रत लगाईं

॥ रम गयी माँ मेरे रोम रोम में ॥


मेरी सांसो में अम्बे के नाम की धारा बहती

इसीलिए तो मेरी जिह्वा हर समय ये कहती


रम गयी माँ मेरे रोम रोम में

रम गयी माँ मेरे रोम रोम में

........................................................................................................
चक्रधर भगवान की पूजा कैसे करें?

भगवान चक्रधर 12वीं शताब्दी के एक महान तत्त्वज्ञ, समाज सुधारक और महानुभाव पंथ के संस्थापक थे। महानुभाव धर्मानुयायी उन्हें ईश्वर का अवतार मानते हैं। उनका जन्म बारहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में, गुजरात के भड़ोच में हुआ था। उनका जन्म नाम हरीपालदेव था।

यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ (Yahan Wahan Jahan Tahan)

यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ,
मत पूछो कहाँ-कहाँ,

जय हो शिव भोला भंडारी (Jai Ho Shiv Bhola Bhandari Lela Aprampar Tumhari Bhajan)

जय हो शिव भोला भंडारी,
लीला अपरंपार तुम्हारी,

बाबा मेहंदीपुर वाले, अंजनी सूत राम दुलारे (Baba Mehandipur Wale, Anjanisut Ram Dulare)

बाबा मेहंदीपुर वाले,
अंजनी सूत राम दुलारे,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने