संसार ने जब ठुकराया तब द्वार तेरे प्रभु आया(Sansaar Ne Jab Thukraya)

संसार ने जब ठुकराया

तब द्वार तेरे प्रभु आया ॥


मैने तुझे कभी ना ध्यया

तूने सदा सदा अपनाया

संसार ने जब ठुकराया ॥


मैं मद माया में झूला

तेरे उपकर को भूला

मैं मृग माया में झूला

तेरे उपकर को भूला


तूने कभी नही बिसराया

तूने सदा सदा अपनाया

मैं ही जाग भरमाया

तूने सदा सदा अपनाया

संसार ने जब ठुकराया ॥


संसार ने जब ठुकराया

तब द्वार तेरे प्रभु आया ॥


था नींद में सोया

शुभ अवसर हाथ से खोया

शुभ अवसर हाथ से खोया

जब लूट रही थी माया

तूने कितनी बार जगाया

संसार ने जब ठुकराया ॥


संसार ने जब ठुकराया

तब द्वार तेरे प्रभु आया ॥


जग में सब कुछ था तेरा

मैं कहता रहा मेरा मेरा

मैं कहता रहा मेरा मेरा

अब अंत समय जब आया

मैं मन मन ही पछताया

हरि शरण तुम्हारी आया

तब चरण मही चढ़ाया ॥


संसार ने जब ठुकराया

तब द्वार तेरे प्रभु आया ॥


संसार ने जब ठुकराया

तब द्वार तेरे प्रभु आया ॥

........................................................................................................
भीष्म अष्टमी पर करें गंगा स्नान

भीष्म अष्टमी सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके वंश में संतान नहीं होती। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

श्रावण मास की कामिका एकादशी (Shraavan Maas Kee Kaamika Ekaadashee)

युधिष्ठिर ने कहा-हे भगवन्! श्रावण मास के कृष्णपक्ष की एकदशी का क्या नाम और क्या माहात्म्य है सो मुझसे कहने की कृपा करें।

मेरा भोला बड़ा मतवाला (Mera Bhola Bada Matwala)

मेरा भोला बड़ा मतवाला,
सोहे गले बीच सर्पों की माला ॥

नमामी राधे नमामी कृष्णम(Namami Radhe Namami Krishnam)

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,
नमामी राधे नमामी कृष्णम,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने