संसार का सारा सुख केवल, श्री राम तुम्हारे चरणों में(Sansar Ka Sara Sukh Keval Shree Ram Tumhare Charno Mein)

संसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में,

प्रतिपल प्रतिक्षण मैं जपा करूँ,

तेरा नाम तुम्हारे चरणों में,

सँसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में ॥


दीनो का दुःख हरने वाले,

दुखियों पे दया करने वाले,

दयासिन्धु न्योछार दास करे,

धन धान तुम्हारे चरणों में,

सँसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में ॥


तुम ही तुम रहो मेरे मन में,

तेरी छवि बसी हो धड़कन में,

दुनिया में मिले तो मिले सदा,

आराम तुम्हारे चरणों में,

सँसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में ॥


करूणानिधि इतनी दया करो,

अपराध मेरे सब क्षमा करो,

‘कोमल’ ‘कुलदीप’ ये गुण गाए,

सुबहो शाम तुम्हारे चरणों में,

सँसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में ॥


संसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में,

प्रतिपल प्रतिक्षण मैं जपा करूँ,

तेरा नाम तुम्हारे चरणों में,

सँसार का सारा सुख केवल,

श्री राम तुम्हारे चरणों में ॥

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प्रबल प्रेम के पाले पड़ के (Prem Ke Pale Prabhu Ko Niyam Badalte Dekha)

प्रबल प्रेम के पाले पड़ के,
प्रभु का नियम बदलते देखा ।

भोले तेरी माया अजब निराली है (Bhole Teri Maya Ajab Nirali Hai)

भोले तेरी माया अजब निराली है,
अजब निराली है,

राधे ब्रज जन मन सुखकारी(Radhe Braj Jan Man Sukhakari)

राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम

मत्स्य द्वादशी के विशेष उपाय

मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मत्स्य द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार को समर्पित है।

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