शेरोवाली के दरबार में रंग बरसे (Sherawali Ke Darbar Mein Rang Barse)

रंग बरसे देखो रंग बरसे,

रंग बरसे देखो रंग बरसे,

शेरोवाली के दरबार में रंग बरसे,

अम्बेवाली दे दरबार में रंग बरसे,

ढोल नगाड़ों ढोलक बजे,

ढोल नगाड़ों ढोलक बजे,

सारे भगत यहाँ झूम के नाचे,

सारे भगत यहाँ झूम के नाचे,

माँ को मनाये सब नच नच के,

शेरोवाली के दरबार में रंग बरसे,


सब से ऊँचा धाम तुम्हारा,

सब से ऊँचा धाम तुम्हारा,

जग में पावन नाम तुम्हारा,

जग में पावन नाम तुम्हारा,

जग जाए किस्मत दर्शन से,

शेरोवाली के दरबार में रंग बरसे,

जोता वाली के दरबार में रंग बरसे,


भक्तो के सब काम बनाये,

भक्तो के सब काम बनाये,

जब भी पुकारे मैया दौड़ी आये,

जब भी पुकारे मैया दौड़ी आये,

काट दिये संकट जन जन के,

शेरोवाली के दरबार में रंग बरसे,

जोता वाली के दरबार में रंग बरसे,

मोहन कौशिक वो तर जाते,

मोहन कौशिक वो तर जाते,

जो सुख में सुमरन कर पाते,

जो सुख में सुमरन कर पाते,

गये हरीश भी तन मन से,

शेरोवाली के दरबार में रंग बरसे,

जोता वाली के दरबार में रंग बरसे,


........................................................................................................
होलाष्टक में करें इन देवी-देवताओं की पूजा

होलाष्टक का समय फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा (होलिका दहन) तक रहता है। यह अवधि अशुभ मानी जाती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।

तेरे दर जबसे ओ भोले, आना जाना हो गया(Tere Dar Jab Se O Bhole Aana Jana Ho Gaya)

तेरे दर जबसे ओ भोले,
आना जाना हो गया,

शेर कैसे बना मां दुर्गा का वाहन

हिंदू धर्म में नवरात्रि के दिनों को बेहद पवित्र और खास माना जाता है। नवरात्रि का त्योहार साल में चार बार आता है। चैत्र माह में आने वाली प्रत्यक्ष नवरात्रि बेहद खास होती है, क्योंकि इसी महीने से सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी।

भोले बाबा से जिनका सम्बन्ध है (Bhole Baba Se Jinka Samband Hai)

भोले बाबा से जिनका सम्बन्ध है,
उनके घर में आनंद ही आनंद है ॥

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने