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सुन राधिका दुलारी में (Sun Radhika Dulari Main)

सुन राधिका दुलारी में,

हूँ द्वार का भिखारी,

तेरे श्याम का पुजारी,

एक पीड़ा है हमारी ,

हमें श्याम न मिला


हम समझे थे कान्हा कही कुंजन में होगा,

अभी तो मिलन का हमने सुख नहीं भोगा


ओ सुनके प्रेम कि परिभाषा,

मन में बंधी थी जो आशा,

आशा भई रे निराशा,

झूटी दे गया दिलाशा

हमें श्याम न मिला


देता है कन्हाई जिसे प्रेम कि दिशा,

सब विधि उसकी लेता भी है परीक्षा


ओ कभी निकट बुलाये, कभी दूरियाँ बढ़ाये,

कभी हषायें रुलाये छलिया हाथ नहीं आये

हमें श्याम ना मिला…


ओ अपना जिसे यहाँ कहे सब कोई, उसके लिए में दिन रात रोई,

ओ नेह दुनिया से तोडा, नाता संवारे से जोड़ा,

उसने ऐसा मुख मोड़ा हमें कही का ना छोड़ा

हमें श्याम ना मिला


ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा नामक एकादशी (Jyesth Mas Ke Krishna Paksh Ki Apara Namak Ekaadshi)

इतनी कथा सुनने के बाद महाराज युधिष्ठिर ने पुनः भगवान् कृष्ण से हाथ जोड़कर कहा-हे मधुसूदन । अब आप कृपा कर मुझ ज्येष्ठ मास कृष्ण एकादशी का नाम और मोहात्म्य सुनाइये क्योंकि मेरी उसको सुनने की महान् अच्छा है।

इक दिन वो भोले भंडारी बन करके ब्रज की नारी(Ik Din Vo Bhole Bhandari Banke Braj Ki Nari)

इक दिन वो भोले भंडारी
बन करके ब्रज की नारी,

फागुन माह का पहला प्रदोष व्रत

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

महातारा जयंती की कथा

हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष स्थान है, जिनमें से एक देवी महातारा हैं। उन्हें शक्ति, ज्ञान और विनाश की देवी माना जाता है। देवी महातारा का स्वरूप गहरे नीले रंग का होता है, उनकी चार भुजाएं होती हैं और वे त्रिनेत्री हैं।

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