गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद, गुरु मेरा पारब्रह्म (Guru Meri Puja Guru Mera Parbrahma)

गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद

गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत


गुरु मेरा देव अलख अभेव

सरब पूज्य, चरण गुरु सेवू

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


गुरु बिन अवर नहीं मैं थाओ

अन दिन जपो, गुर गुर नाओ

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


गुरु मेरा ग्यान, गुरु रिदे धयान

गुरु गोपाल पुरख भगवान्

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


गुरु की सरन रहूँ कर जोर

गुरु बिना मैं नाही होर

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


गुरु बोहित तारे भव पार

गुरु सेवा ते यम छुटकार

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


अन्धकार में गुरु मन्त्र उजारा

गुरु कै संग सगल निस्तारा

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


गुरु पूरा पाईये वडभागी

गुरु की सेवा दुःख ना लागी

॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद...॥


गुरु का सबद ना मेटे कोई

गुरु नानक नानक हर सोए


गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद

गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत

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कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि(Ki Ban Gaye Nandlal Lilihari)

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,
री लीला गुदवाय लो प्यारी ।

मत्स्य अवतार की पूजा कैसे करें?

मत्स्य अवतार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से प्रथम है। मत्स्य का अर्थ है मछली। इस अवतार में भगवान विष्णु ने मछली के रूप में आकर पृथ्वी को प्रलय से बचाया था।

महिमा भोलेनाथ की सुनाएंगे (Mahima Bholenath Ki Sunayenge)

जय जय नमामि शंकर,
गिरिजापति नमामि शंकर,

धरती गगन में होती है (Dharti Gagan Mein Hoti Hai)

धरती गगन में होती है,
तेरी जय जयकार ॥

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