ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ(Le Chal Apni Nagariya, Avadh Bihari Sanvariya)

ले चल अपनी नागरिया,

अवध बिहारी साँवरियाँ ।

अवध बिहारी सांवरिया,

लें चल अपनी नागरिया ।

ले चल अपनी नागरिया,

अवध बिहारी साँवरियाँ ॥


सरयू के तीर अयोध्या नगरी,

सरयू के तीर अयोध्या नगरी,

संत भरे जहाँ गागरिया,

संत भरे जहाँ गागरिया ,

अवध बिहारी सांवरिया,

लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया,

अवध बिहारी साँवरियाँ ॥


कनक भवन सिया रघुवर राजे,

कनक भवन सिया रघुवर राजे,

देख भई मैं बावरिया,

देख भई मैं बावरिया,

अवध बिहारी सांवरिया,

लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया,

अवध बिहारी साँवरियाँ ॥


ले चल अपनी नागरिया,

अवध बिहारी साँवरियाँ,

अवध बिहारी सांवरिया,

लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया,

अवध बिहारी साँवरियाँ ॥


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बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी (Banke Bihari Ki Bansuri Banki)

बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी,
पे सुदो करेजा में घाव करे री,

गाइये गणपति सुबहो शाम(Gaiye Ganpati Subaho Shaam)

गाइये गणपति सुबहो शाम,
मंगलमूर्ति मंगलकारी,

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं (Hum Ram Ji Ke Ram Ji Hamare Hain)

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं ।
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं ।

प्रदोष व्रत की कथा (Pradosh Vrat Ki Katha )

प्राचीनकाल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था। उस पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पुत्र को साथ लेकर भीख मांगती हुई शाम तक घर वापस आती थी।

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