तुम शरणाई आया ठाकुर(Tum Sharnai Aaya Thakur)

तुम शरणाई आया ठाकुर

तुम शरणाई आया ठाकुर ॥


उतरि गइओ मेरे मन का संसा,

जब ते दरसनु पाइआ ॥

तुम शरणाई आया ठाकुर


अनबोलत मेरी बिरथा जानी

अपना नामु जपाइआ ॥

तुम शरणाई आया ठाकुर


दुख नाठे सुख सहजि समाए,

अनद अनद गुण गाइआ ॥

तुम शरणाई आया ठाकुर


बाह पकरि कढि लीने अपुने,

ग्रिह अंध कूप ते माइआ ॥

तुम शरणाई आया ठाकुर


कहु नानक गुरि बंधन काटे,

बिछुरत आनि मिलाइआ ॥

तुम शरणाई आया ठाकुर


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पहले ध्यान श्री गणेश का, मोदक भोग लगाओ (Pehle Dhyan Shree Ganesh Ka Modak Bhog Lagao)

पहले ध्यान श्री गणेश का,
मोदक भोग लगाओ,

सूर्य चालीसा (Surya Chalisa)

कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।

तेरे मन में राम, तन में राम (Tere Mann Mein Ram Tan Mein Ram)

तेरे मन में राम,
तन में राम ॥

दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को क्या भोग लगाएं

हिंदू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत अत्यंत शुभ माना गया है। यह पर्व हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा और व्रत के साथ उन्हें विशेष भोग अर्पित करने का विधान है।

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