आउंगी आउंगी मै अगले, बरस फिर आउंगी (Aaungi Aaungi Main Agle Baras Phir Aaungi)

आउंगी आउंगी मैं अगले,

बरस फिर आउंगी,

लाऊंगी लाऊंगी तेरी,

लाल चुनरियाँ लाऊंगी ॥


माता ओ माता,

पहाड़ो वाली माता ॥


तेरी महिमा सुनते है,

तेरी महिमा गाते है,

आँख में आंसू लाते है,

मोती लेकर जाते है ॥


आउंगी आउंगी मैं अगले,

बरस फिर आउंगी,

लाऊंगी लाऊंगी तेरी,

लाल चुनरियाँ लाऊंगी ॥


पर्वत पे है डेरा,

ऊँचा मंदिर तेरा,

तेरी शरण में आके,

जागा जीवन मेरा,

जय शेरावाली दी,

जय मेहरवाली दी,

जय मातारानी दी ॥


माता ओ माता,

पहाड़ो वाली माता ॥


मन में है तेरी भक्ति,

हम जाने तेरी शक्ति,

दुःख क्या है दुःख छाया,

भी हमको छू नहीं सकती ॥


जितनी शक्तिशाली,

उतनी ही तू भोली,

बिन मांगे ही तूने,

भर दी मेरी झोली ॥


जय शेरावाली दी,

जय मेहरवाली दी,

जय मातारानी दी ॥


आउंगी आउंगी मै अगले,

बरस फिर आउंगी,

लाऊंगी लाऊंगी तेरी,

लाल चुनरियाँ लाऊंगी ॥


तन पूजा की थाली,

सामग्री है मन की,

माँ तेरे चरणों में,

भेंट ये निर्धन की,

जय भवना वाली दी,

जय छतरा वाली दी,

जय माता रानी दी ॥


आउंगी आउंगी मै अगले,

बरस फिर आउंगी,

लाऊंगी लाऊंगी तेरी,

लाल चुनरियाँ लाऊंगी ॥


तेरी महिमा सुनते है,

तेरी महिमा गाते है,

आँख में आंसू लाते है,

मोती लेकर जाते है ॥


आउंगी आउंगी मै अगले,

बरस फिर आउंगी,

लाऊंगी लाऊंगी तेरी,

लाल चुनरियाँ लाऊंगी ॥


माता ओ माता,

पहाड़ो वाली माता ॥

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हरियाली अमावस्या : पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा पर्व

आज 4 अगस्त यानी रविवार को हरियाली अमावस्या है, ये तिथि भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास की एक विशेष तिथि है जो हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि साल के इस समय धरती हरियाली की चादर से ढक जाती है इसलिए श्रावण अमावस्या को हरियाली का त्यौहार कहा जाता है।

कदम कदम पर रक्षा करता (Kadam Kadam Par Raksha Karta)

कदम कदम पर रक्षा करता,
घर घर करे उजाला उजाला,

मै तो लाई हूँ दाने अनार के (Main To Layi Hu Daane Anaar Ke)

मैं तो लाई हूँ दाने अनार के,
मेरी मैया के नौ दिन बहार के ॥

रविवार के व्रत कथा (Ravivaar Ke Vrat Katha)

रविवार व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती।

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