आये नवरात्रे मैया, उपकार कीजिय (Aaye Navratre Maiya, Upkar Kijiye)

अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये,

आये नवरात्रे मैया,

उपकार कीजिये,

अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये ॥


माँ सिंह सवारी करके,

अब जल्दी से आ जाओ,

हर घर में ज्योतावाली,

खुशियों के दीप जलाओ,

हम दीनो पर,

ममता की बौछार कीजिये,

अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये ॥


हम बालक मेहरावाली,

हमें अपने गले लगाओ,

परिवार पे हम बच्चो के,

अपनी ये मेहर बरसाओ,

मझधार पड़ी,

जो नैया वो भव पार कीजिये,

अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये ॥


धन दौलत सोना चांदी,

महलों की चाह नहीं है,

हर पल सेवा मैं रहूं बस,

मेरे मन आस यही है,

इस ‘अमन’ की इतनी,

अर्ज़ी माँ स्वीकार कीजिये,

अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये ॥


अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये,

आये नवरात्रे मैया,

उपकार कीजिये,

अब करके दया,

हम बच्चों का उद्धार कीजिये ॥

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माँ की लाल रे चुनरिया(Maa Ki Laal Re Chunariya)

माँ की लाल रे चुनरिया,
देखो लहर लहर लहराए,

सच्चा है माँ का दरबार, मैय्या का जवाब नहीं (Saccha Hai Maa Ka Darbar, Maiya Ka Jawab Nahi)

दरबार हजारो देखे है,
पर माँ के दर सा कोई,

रुक्मिणी अष्टमी की कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। देवी रुक्मिणी मां लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक थीं।

भाद्रपद शुक्ल की वामन एकादशी (Bhadrapad Shukal Ke Vaman Ekadashi )

इतनी कथा सुनकर पाण्डुनन्दन ने कहा- भगवन्! अब आप कृपा कर मुझे भाद्र शुक्ल एकादशी के माहात्म्य की कथा सुनाइये और यह भी बतलाइये कि इस एकादशी का देवता कौन है और इसकी पूजा की क्या विधि है?

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