अब मैं सरण तिहारी जी (Ab Main Saran Tihari Ji)

अब मैं सरण तिहारी जी,

मोहि राखौ कृपा निधान ॥


अजामील अपराधी तारे,

तारे नीच सदान ।

जल डूबत गजराज उबारे,

गणिका चढी बिमान ॥


अब मैं सरण तिहारी जी,

मोहि राखौ कृपा निधान ॥


और अधम तारे बहुतेरे,

भाखत संत सुजान ।

कुबजा नीच भीलणी तारी,

जागे सकल जहान ॥


अब मैं सरण तिहारी जी,

मोहि राखौ कृपा निधान ॥


कहँ लग कहूँ गिणत नहिं आवै,

थकि रहे बेद पुरान ।

मीरा दासी शरण तिहारी,

सुनिये दोनों कान ॥


अब मैं सरण तिहारी जी,

मोहि राखौ कृपा निधान ॥

अब मैं शरण तिहारी जी,

मोहि राखौ कृपा निधान ॥

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मैंने रटना लगाई रे, राधा तेरे नाम की (Maine Ratna Lagai Re Radha Tere Naam Ki)

मैंने रटना लगाई रे,
राधा तेरे नाम की,

अथ तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Tantroktam Ratri Suktam)

तन्त्रोक्तम् रात्रि सूक्तम् यानी तंत्र से युक्त रात्रि सूक्त का पाठ कवच, अर्गला, कीलक और वेदोक्त रात्रि सूक्त के बाद किया जाता है।

होलिका दहन की राख से धनलाभ

होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर किया जाता है, इसे छोटी होली भी कहते हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत और सच्ची भक्ति का प्रतीक है।

श्री ब्रह्मा चालीसा (Shri Brahma Chalisa)

जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू, चतुरानन सुखमूल।
करहु कृपा निज दास पै, रहहु सदा अनुकूल।

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