अर्जी सुनकर मेरी मैया, घर में मेरे आई (Arji Sunkar Meri Maiya, Ghar Mein Mere Aayi)

अर्जी सुनकर मेरी मैया,

घर में मेरे आई,

झूम झूम के नाचूं मैं तो,

बाटूँ आज बधाई,

नाचूँ झूम झूम के,

गाऊं झूम झूम के ॥


सबसे पहले मैया रानी,

के मैं चरण धुलाऊँ,

माँ के पावों के कुमकुम को,

माथे अपने लगाऊं,

देख देख के जगदम्बे को,

अखियां भर भर आई,

झूम झूम के नाचूं मैं तो,

बाटूँ आज बधाई,

नाचूँ झूम झूम के,

गाऊं झूम झूम के ॥


बिन दर्शन के मैया मेरा,

जीवन था अधुरा,

तेरे आने से मेरी मैया,

सपना हुआ है पूरा,

अपने गले लगाकर मुझको,

किरपा है बरसाई,

झूम झूम के नाचूं मैं तो,

बाटूँ आज बधाई,

नाचूँ झूम झूम के,

गाऊं झूम झूम के ॥


छप्पन भोग छत्तीसो मेवा,

हाथों से खिलाऊँ,

मेहँदी लगाऊ चुनड़ी ओढाऊँ,

तेरा लाड़ लड़ाऊँ,

‘श्याम’ कहे इच्छा हुई पूरी,

माँ मेरी मनचाही,

झूम झूम के नाचूं मैं तो,

बाटूँ आज बधाई,

नाचूँ झूम झूम के,

गाऊं झूम झूम के ॥


अर्जी सुनकर मेरी मैया,

घर में मेरे आई,

झूम झूम के नाचूं मैं तो,

बाटूँ आज बधाई,

नाचूँ झूम झूम के,

गाऊं झूम झूम के ॥

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श्री बालाजी चालीसा (Shri Balaji Chalisa)

श्री गुरु चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान ।
बालाजी चालीसा लिखे “ओम” स्नेही कल्याण ।।

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि

मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। सनातन धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का एक विशेष महत्व है, यह दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का होता है।

गौंरी सुत गणराज गजानन, विघ्न हरण मंगल कारी (Gauri Sut Ganraj Gajanan Vighna Haran Mangal Kari)

गौरी सुत गणराज गजानन,
विघ्न हरण मंगल कारी,

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