है सुखी मेरा परिवार, माँ तेरे कारण (Hai Sukhi Mera Parivaar Maa Tere Karan)

है सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण,

तेरे कारण तेरे कारण,

मैया बस तेरे कारण,

मेरे घर में मौज बहार,

माँ तेरे कारण,

हैं सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण ॥


मैया मेरी ये फुलवारी,

तुम ही इसकी पालनहारी,

मेरा सुखमय है संसार,

माँ तेरे कारण,

हैं सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण ॥


फूल खिले मेरे आँगन में,

पले बड़े तेरे आँचल में,

मेरा भरा हुआ भंडार,

माँ तेरे कारण,

हैं सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण ॥


सौंप दिया माँ तेरे हवाले,

‘उर्मिल’ को माँ तू ही संभाले,

मुझे मिला तेरा दरबार,

माँ तेरे कारण,

हैं सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण ॥


है सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण,

तेरे कारण तेरे कारण,

मैया बस तेरे कारण,

मेरे घर में मौज बहार,

माँ तेरे कारण,

हैं सुखी मेरा परिवार,

माँ तेरे कारण ॥

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जब निर्वस्त्र होकर नहा रहीं गोपियों को नटखट कन्हैया ने पढ़ाया मर्यादा का पाठ

भगवान विष्णु ने रामावतार लेकर जगत को मर्यादा सिखाई और वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। वहीं कृष्णावतार में भगवान ने ज्यादातर मौकों पर मर्यादा के विरुद्ध जाकर अपने अधिकारों की रक्षा और सच को सच कहने साहस हम सभी को दिखाया।

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