होली आई रे होली आई रे(Holi Ae Re Holi Aae Re)

होली आई रे होली आई रे होली आई वृन्दावन खेले गोरी ॥

भागन पे आयो है फागण महीना कभू प्रेम की होरी बईं न,

हिरदये की आशा लता खिली है उमगी उमगी रस धारा वही है,

खूब चली पिचकारी रे पिचकारी चला दो भर जोरि,

होली आई रे होली आई रे होली आई वृन्दावन खेले गोरी ॥


गोरी रंगीली होरी खेलन को आओ,

सोला शृंगार कर खेलन पधारो,

ढोलक मंजीरा और जांज बजाओ,

सखियाँ की सेना लेके नाचन को आओ,

घर घर से बन आई बन आई शक्ल ब्रिज की गोरी,

होली आई रे होली आई रे होली आई वृन्दावन खेले गोरी ॥


जा जा निर्मोही छेला मोह से न करो बात,

छलियाँ निर्मोही तुमको करो धात,

मीठी मीठी बातन से मन न लुभाओ ,

मैं तो हारी मोहे अब न सताओ,

मैंने परख ले चतुराई रे ,

चतुराई परख ले अब टोरी,

होली आई रे होली आई रे होली आई वृन्दावन खेले गोरी ॥

........................................................................................................
हरि हरि हरि सुमिरन करो (Hari Hari Hari Sumiran Karo)

हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो,
हरि चरणारविन्द उर धरो

दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं(Duniya Rachne Wale Ko Bhagwan Kehte Hain)

दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं,<,br> और संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।

जगमग हुईं अयोध्या नगरी, सन्त करें गुणगान (Jagmag Hui Ayodhya Nagari Sant Kare Gungan)

जगमग हुई अयोध्या नगरी,
रतन सिंहासन राम विराजें,

गजानन करदो बेड़ा पार(Gajanan Kardo Beda Paar)

गजानन करदो बेड़ा पार,
आज हम तुम्हे मनाते हैं,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने