जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा (Jaha Le Chaloge Vahi Me Chalunga)

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ।


ये जीवन समर्पित, चरण में तुम्हारे,

तुम्ही मेरे सर्वस्व, तुम्ही प्राण प्यारे,

तुम्हे छोड़कर नाथ, किससे रहूँगा ।

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ॥


दयानाथ दयानिधि, मेरी अवस्था,

तेरे ही हाथो में, मेरी व्यवस्था,

कहना होगा जो भी, तुमसे रहूँगा ।

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ॥


ना कोई शिकायत, ना कोई अर्जी,

कहलो करालो, जो तेरी मर्जी,

सहाओगे जो भी, हंस के सहूँगा ।

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ॥


जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा ।

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सात्विक मंत्र के क्या लाभ है?

सात्विक मंत्रों का जाप हमारे जीवन को सकारात्मकता और शांति से भर सकता है। ये मंत्र न केवल आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होते हैं, बल्कि मन की अशांति और नकारात्मक विचारों को भी दूर करते हैं।

मै चाहूं सदा दर तेरे आना (Main Chahu Sada Dar Tere Aana)

मैं चाहूँ सदा दर तेरे आना,
तू यूँ ही बुलाना दातिए,

कब तुम कृपा करोगी श्री राधा रानी (Kab Tum Kripa Karogi Shri Radha Rani)

कब तुम कृपा करोगी श्री राधा रानी,
कब तुम कृपा करोगी मेरी लाड़ो प्यारी,

जब निर्वस्त्र होकर नहा रहीं गोपियों को नटखट कन्हैया ने पढ़ाया मर्यादा का पाठ

भगवान विष्णु ने रामावतार लेकर जगत को मर्यादा सिखाई और वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। वहीं कृष्णावतार में भगवान ने ज्यादातर मौकों पर मर्यादा के विरुद्ध जाकर अपने अधिकारों की रक्षा और सच को सच कहने साहस हम सभी को दिखाया।

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